राज्य अतिथि शिक्षक (विद्या मितान) संघ का बोनस अंक के विरोध सहित नियमितीकरण की मांग को लेकर जंग जारी.. दुरस्त ,बीहड़ नक्सलवाद, प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा का दीप जलाने वालों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, आखिर कब जागेगी सरकार?

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रायपुर/ छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षको का अपने भविष्य को लेकर सरकार के साथ जंग जारी है। ये वही अतिथि शिक्षक है जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगा रहे है। लेकिन कई वर्षो से लगातार सेवा देने व सत्ता में आने से पूर्व कांग्रेस के घोषणा पत्र में किए वादे के बावजूद इनकी जायज मांगों को पूरा नहीं करना इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होना साबित हो रहा है। वही वर्तमान में भी ये सरकार के साथ जायज मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे है।

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इसी कड़ी में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्या मितान) संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश साहू व प्रान्तीय टीम व समस्त जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में पूरे छत्तीसगढ़ में कार्यरत अतिथि शिक्षकों द्वारा 2 अंक बोनस के विरोध में व जन घोषणा पत्र के अनुरूप नियमितीकरण की मांग को लेकर राजधानी रायपुर के माना तूता में 20 मई से 22 मई तक धरना प्रदर्शन किया गया। विद्या मितान अतिथि शिक्षक दुरस्त ,बीहड़ नक्सलवाद, प्रभावित क्षेत्र में 2016 से आज पर्यन्त तक शिक्षा का दीप जलाकर शिक्षा के स्तर में लगातार बढ़ोतरी कर रही है। सुकमा जिले से लेकर बलरामपुर आज शिक्षा के स्तर मे सुधार हो रहा है। छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले का स्तर प्रथम स्थान पर है। बस्तर संभाग व सरगुज़ा संभाग के साथ प्रदेश के माडा पैकेट क्षेत्र में सेवा देने वाले सभी अतिथि शिक्षकों का भविष्य उजाला नजर नही आ रहा है। इस कारण मजबूर होकर बोनस के विरोध में अपने जन घोषणा पत्र के मांग नियमितीकरण को लेकर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। यहां भी सरकार द्वारा इनके नियमिति करण के जायज मांगों को कुचलने का प्रयास करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की अनुमति नहीं दी दिया जा रहा है। जिस पर राज्य अतिथि शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश साहू के कहा कि पुनः आवेदन दे दिया गया हड़ताल की अनुमति मिलने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

बहरहाल राज्य अतिथि शिक्षक (विद्या मितान) अपनी जायज मांगों को लेकर सरकार से जंग लडने को मजबूर है, लेकिन देखने वाली बात होगी कि सबको साथ लेकर चलने वाली भूपेश सरकार अपने पूर्व में किए चुनावी वादे को पूरा करती है या फिर नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगाने वालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते रहते है।

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