पहले दिन ही लैंड नहीं हुई इंदौर-बिलासपुर फ्लाइट, एयरपोर्ट के ऊपर चक्कर लगाकर चली गई रायपुर, मौसम के कारण जबलपुर- दिल्ली फ्लाइट भी कैंसिल..

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बिलासपुर// चकरभाठा स्थित बिलासा एयरपोर्ट में शुरू हुई इंदौर के लिए हवाई सुविधा पहले ही दिन गड़बड़ हो गई। CM भूपेश बघेल, केंद्रीय उड्‌डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत नेताओं ने फ्लाइट को हरी झंडी दिखाकर इंदौर के लिए रवाना तो कर दिया। लेकिन, वापसी में यह फ्लाइट बिलासपुर में लैंड नहीं हो सकी। इसके चलते फ्लाइट को रायपुर में उतारना पड़ा। इससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, जबलपुर से दिल्ली के लिए उड़ान भी रद्द करना पड़ी। दरअसल, एयरपोर्ट में वेदर इंफॉर्मेशन सिस्टम सहित नाइट लैंडिंग की सुविधाएं नहीं हो पाने के कारण इस तरह की दिक्कतें आए दिन होते रहती हैं।

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5 जून से शुरू हुई बिलासपुर- भोपाल हवाई सेवा को बंद कर अब इंदौर के लिए शुरू किया गया है। सोमवार की सुबह नागरिक उड्‌डयन मंत्रालय ने इसकी शुरुआत की। सप्ताह में चार दिन सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को यह सुविधा उपलब्ध रहेगी। सोमवार को दोपहर इंदौर पहुंचने के बाद फ्लाइट ने वापसी के लिए बिलासपुर के लिए उड़ान भरी। यहां उसे 3.45 बजे लैंड करना था। लेकिन, शाम को मौसम में आई खराबी के चलते फ्लाइट यहां लैंड नहीं कर पाई। पायलट ने हवा में मंडराते हुए दो बार फ्लाइट को लैंड करने की कोशिश की। मगर सफलता नहीं मिल पाई। इसकी वजह से फ्लाइट को रायपुर में उतारना पड़ा। साथ ही जबलपुर-दिल्ली फ्लाइट को कैंसिल करना पड़ा।

आठ माह से रखी है वेदर सिस्टम की मशीनें, लेकिन लगी नहीं

एयरपोर्ट को लेकर अधिकारियों की उदासीनता लगातार सामने आ रही है। एयरपोर्ट में मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए मौसम विभाग की ओर से एयरपोर्ट में रनवे के पास 10 फीट ऊंचा टावर और सेंसर लगाया जाना है, इसे डिजिटल करंट वेदर इंफॉर्मेशन सिस्टम कहते हैं। यह मशीन पिछले 9 माह से बिलासा एयरपोर्ट पर रखी गई है, लेकिन अनुमति के अभाव में अब मौसम विभाग इसका इंस्टालेशन नहीं करा सका है।

दरअसल इसे लगाने के लिए राज्य सरकार और DGCA की अनुमति की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने मशीन लगाने के लिए दो माह पहले ही अनुमति दी है। मगर DGCA से अनुमति नहीं मिल पाई है। इसकी वजह से मशीन नहीं लग सकी है। मशीन के अभाव में अभी भी फ्लाइट के लैंडिंग और टेकऑफ से पहले मैनुवल तरीके से ही मौसम की जानकारी ली जाती है , जबकि मशीन के द्वारा यह सभी सूचनाएं ऑटोमेटिक जनरेट हो सकती है।

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