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रायगढ़// जिले का तमनार तहसील आए दिन सुर्खियों में रहता है। कभी आर आई (RI) के द्वारा काम के एवज में पैसा लेने पर तो कभी पैसा लेकर काम नहीं करने पर तो कभी लंबित आवेदनों का निराकरण नहीं होने पर। ताजा मामला तमनार तहसील से सामने आया है। जहां आरोप है कि तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर कर पटवारी ने किसानों को पट्टा जारी किया है। इस मामले में तमनार तहसीलदार ने रायगढ़ कलेक्टर से शिकायत की है।
क्या है पूरा मामला..
तमनार तहसीलदार टीआर कश्यप नें पटवारी जितेंद्र पन्ना (हल्का नंबर 14) के द्वारा किसान किताब में तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर कर किसानों को पट्टा प्रदाय करने के कारण उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई करने व FIR दर्ज कराने की अनुमति बाबत कलेक्टर भू अभिलेख शाखा रायगढ़ में आवेदन दिया है। अपनी शिकायत में तहसीलदार ने बताया कि पटवारी जितेंद्र पन्ना (हल्का नंबर 14अतिरिक्त प्रभार 16) तहसील तमनार जिला रायगढ़ में विगत 2 वर्षों से पदस्थ है। उनको किसानों द्वारा जानकारी मिली कि उक्त पटवारी ने उनका फर्जी हस्ताक्षर कर किसान किताब जारी किया है। जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार द्वारा कुछ किसानों से संपर्क किया गया और किसानो से किसान किताब मंगाकर जांच किया गया तब तहसीलदार को पता चला कि उक्त पटवारी के द्वारा जारी किए गर किसान किताब में उनका फर्जी हस्ताक्षर किया गया है।
इस मामले में तहसीलदार को अब तक 12 किसान किताब की छाया प्रति प्राप्त हो चुका है। जो शिकायत पत्र में संलग्न है, इसके अलावा भी उनको शक है कि उक्त पटवारी द्वारा अपने प्रभार क्षेत्र के गांव में और भी किसानों को फर्जी हस्ताक्षर वाले पट्टे सहित अन्य दस्तावेज जारी किए गए है। मामले में तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर किए हुए किसान किताब सुरेश सुधीर, सुशील, प्रवीण कुमार, प्रकाश राठिया, नवीन राठिया, शकुंतला पंडा, इंदिरा पंडा रेखा पंडा प्रभाषिनी, सुनीता मोहित राम, कुंज बिहारी, रमेश सहसराम, गुरुवारी ग्राम रोडोपाली के प्राप्त हुए है।


पूर्व में हो चुका है स्थानांतरण
पूर्व में जितेन पन्ना पटवारी का स्थानांतरण भी लैलूंगा ब्लाक में हो गया था, परंतु पटवारी ने अपने राजनैतिक पहुंच लगाकर स्थानांतरण रुकवा लिया। इतना ही नही इस मामले में पटवारी का कथित ऑडियो भी वायरल हुआ है।
वैसे देखा जाए तो पटवारी का पद काफी छोटा होता है मगर काफी महत्वपूर्ण भी होता है। मात्र 12वीं पास की अहर्ता रखने वाले मामूली सी तनख्वाह पर वरदान प्राप्त कुछ पटवारी नौकरी के चंद सालों में ही बहुमंजिला इमारतों के साथ करोड़ों की संपत्ति बना लेते हैं। अगर आय से अधिक संपत्ति की जांच की जाए तो काफी लोग इस के कटघरे में आएंगे। फिलहाल इस मामले ने ये तो जग जाहिर कर दिया है कि हजारों की तनखा को करोड़ों में कन्वर्ट करने का पैटर्न क्या है..??




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