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पाली/ यह वारदात जिले के पाली थाना स्थित चैतुरगढ़ के ग्राम केराझरिया की है. जहां 3 साल पहले निवासी फूलवती व परिवार के सदस्यों सहित सोना-चांदी में भूत-प्रेत की बाधा होने का भय दिखाकर, झाड़-फूंक से प्रेत बाधा दूर करने का झांसा देकर आरोपियो द्वारा 64 हजार रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया. वही 3 साल पहले किए गए इस वारदात के फरार दो दंपति सहित 5 आरोपियों को पाली पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है.
पाली थाना प्रभारी निरीक्षक लीलाधर राठौर के अनुसार घटना वर्ष 2017 की है. सरगुजा जिले के बिशुनपुर बाबापारा थाना सीतापुर निवासी संपत गिरी पिता लखन उर्फ डॉक्टर गिरी 26 वर्ष, बुच्चन गिरी पिता बदेश्वर 34 वर्ष, करूमु गिरी पिता किर्ता गिरी 50 वर्ष, मती गिरी पति बुच्चन 30 वर्ष एवं सुमित्रा बाई पति करूमु गिरी 48 वर्ष के द्वारा पाली थाना क्षेत्र के ग्राम केराझरिया निवासी फूलवती रोहिदास के घर आए थे.
थाना प्रभारी ने बताया कि ठगों का यह गिरोह पाली के चैतुरगढ़ में आयोजित मेला में शामिल होने आया था और रात का बहाना कर फूलवती के घर में शरण ली थी. इस दौरान इन्होंने फूलवती के द्वारा पाली गई मुर्गी को कुछ खिला दिया और वह कुछ देर बाद ऐंठने लगी तब उपरोक्त लोगों ने झाड़-फूंक कर इस तरह की तकलीफ का इलाज करने की बात कही. फूलवती इनके झांसे में आ गई और आरोपियो ने फायदा उठाकर उसके सोने-चांदी के जेवरातों में भूत-प्रेत होने का भय दिखाया और 54 हजार 500 रुपये कीमती जेवरातों को कब्जे में लेकर वापस मांगने पर मुर्गी की तरह ही ऐंठ-ऐंठकर मर जाने का भय दिखाया. झाड़-फूंक के एवज में 10 हजार रुपए नगद भी ले लिया. ठगी करने वालों के द्वारा 3 दिन तक फूलवती के घर में रहकर पूजा- अर्चना करते हुए तीसरे दिन कहा गया कि वे लोग चैतुरगढ़ जा रहे हैं और वहां से वापस आते ही सभी दुख परेशानियों को दूर कर दिया जाएगा, इसके बाद फरार हो गये.
ठगी का आभास होने पर फूलवती ने पाली थाना में घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई. प्रकरण में धारा 420, 34 भादवि के तहत जुर्म दर्ज किया गया. इस पुराने प्रकरण में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पाली थाना प्रभारी के द्वारा उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में अधीनस्थ उपनिरीक्षक आरएस मिश्रा, प्रधान आरक्षक अश्वनी निरंकारी, हिरावन सिंह श्रोते, आरक्षक शैलेंद्र सिंह तंवर, विनोदनाथ योगी के साथ आरोपियों के गांव में दबिश देकर गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई.
यहां यह बताना लाजमी होगा कि आरोपियों की धर-पकड़ में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. पुलिस के पास आरोपियों का कोई नाम-पता नहीं था, सिर्फ उपनाम गिरी ही जानते थे जिसके आधार पर सुराग तलाशते-तलाशते जिले के सीमांत गांवों में पतासाजी करते-करते ग्राम बिशुनपुर पहुंचे. पुलिस ने 3 दिन तक ग्राम बिशुनपुर में कैम्प लगाया और अपने मुखबिर सक्रिय किए. इस दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि कि मुख्य आरोपी संपत गिरी पत्थलगांव गया हुआ है जिस पर पुकिस ने उसके लौटने का इंतजार किया. घर लौटे आरोपी संपत गिरी की सूचना मुखबिर से मिलते ही उसे पुकिस द्वारा दबोच लिया गया और शेष आरोपी भी पकड़ लिए गए.

