रामायण के रचयिता, संस्कृत के महान विद्वान, महर्षि बाल्मीकि गुरुवर के चरणों में सादर प्रणाम : डॉ एमपी सिंह

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रायपुर// अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एमपी सिंह ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही भारत में ऋषि मुनियों का डेरा रहा है। यहां पर योगी तपस्वी ज्ञानी विज्ञानी दूरदर्शी आदि महापुरुषों का जन्म हुआ है, जिनमें महर्षि बाल्मीकि जी का प्रमुख स्थान है।

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डॉ एमपी सिंह ने बताया कि 20 अक्टूबर को महर्षि बाल्मीकि जयंती राष्ट्रीय स्तर पर बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन अनेकों प्रकार की झांकियां जुलूस और रैली निकाली जाती हैं तथा महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र पर पुष्प अर्पित करके लोग गौरवान्वित महसूस करते हैं। डॉ सिंह ने बताया कि इस दिन बाल्मीकि जी के जीवन को याद किया जाता है और उनके जीवन से प्रेरणा ली जाती है साथ ही इस दिन को प्रकट दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन अधिकतम लोग एक दूसरे को बधाई व संदेश भेजते हैं।

महर्षि वाल्मीकि प्रकाश पुंज योगी तपस्वी ज्ञानी विज्ञानी और दूरदर्शी थे जिन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र को पहले ही संस्कृत भाषा में कलमबंध कर दिया और उनके पुत्र लव और कुश को शिक्षा, सभ्यता, संस्कार, धनुर्विद्या, गायन-वादन, योग आदि में निपुण व पारंगत कर दिया। डॉ एमपी सिंह ने कहा कि गुरु सबसे महान होते हैं, जो सबको ज्ञान देते हैं। अंधकार को प्रकाश में बदलते हैं अज्ञानी को ज्ञानी बनाते हैं। जड़ को चेतन बनाते हैं, जीना सिखाते हैं। इसलिए ऐसे महान गुरु और संरक्षक को बारंबार प्रणाम है। जिन्होंने सीता जी को अपने आश्रम मैं आश्रय दिया और उनकी कोख में पल रहे रत्नों की रक्षा और सुरक्षा की तथा पैदा होने के बाद उनको भौतिक, अध्यात्मिक सामाजिक व सांसारिक ज्ञान देकर महान आत्मा बनाया।

डॉ एमपी सिंह ने कहा कि इस जयंती पर हमें सीख लेनी चाहिए और संकल्प लेना चाहिए कि कोई भी बुराई सफलता प्राप्ति के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती है। यदि हम अपने जीवन को बदलने की ठान लें तो हमें कोई भी नहीं रोक सकता। सिर्फ सही दिशा में सही समय पर काम करने की जरूरत है। बुद्धि और विवेक से लिए गए फैसले हमेशा सम्मान दिलाते हैं इसलिए हमें सचेत रहना चाहिए और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अच्छे गुरुओ की शरण लेकर सकारात्मक कार्य करना चाहिए।

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