महान प्रतापी राजा गुरु बालक दास के जयंती के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का हुआ आयोजन, हजारों की संख्या में सतनामी समाज के लोग रहे शामिल, अब बाबा गुरु घासीदास चौक के नाम से जाना जाएगा दाऊपारा चौक..

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मुंगेली/ महानप्रतापी राजा गुरु बालक दास की जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में सतनामी समाज के सर्वोच्च गुरू गद्दीनसीन खपरी पूरी धाम आसान दास साहेब उपस्थित रहे। इनके आगमन के बाद पूजा अर्चना कर डीजे, धूमाल के साथ शोभायात्रा की शुरुवात की गई।

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शोभायात्रा के दौरान समाज के युवक-युवतियों व पंथी, अखाड़ा दल द्वारा शौर्य प्रदर्शन किया गया। भव्य शोभायात्रा सतनाम भवन से निकलकर दाउपारा से होते गोल बाजार से रायपुर रोड सिंधी कॉलोनी चौक, न्यू बस स्टैंड, नेहरू चौक, पड़ाव चौक पहुंची तत्पश्चात बालानी चौक, गोल बजार होकर पुराना बस स्टैंड से सतनाम भवन पहुंच रैली संपन्न हुआ।

शोभायात्रा के दौरान बिलासपुर रोड दाऊपारा चौक को हजारों की संख्या में समाज के लोग व जनप्रतिनिधियो एवं मुंगेली नगर वासियों की गरिमामय उपस्थिति में बाबा गुरु घासीदास दास चौक के नाम से नामकरण करते हुए मुख्यअतिथि के रूप में पधारे गुरू आसान दास साहेब के द्वारा बोर्ड का लोकार्पण किया गया। अब मुंगेली दाउपारा चौक को परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास चौक के नाम से जाना जाएगा।

मुंगेली में गुरु बालक दास व सतनामी समाज का इतिहास:-

मुंगेली जिले में सतनामी समाज के इतिहास की बात किया जाए तो बहुत ही ऐतिहासिक व कट्टर वादी रहा है। मुंगेली महान प्रतापी राजा गुरु बालक दास व पूरे सतनामी समाज का संघर्ष स्थल रहा है। चाहे हक अधिकार के लिए हो चाहे लोक कल्याण के लिए हो। सतनामी समाज हमेशा से भाई चारा व सभी में समानता बनाए रखने के लिए सालो से संघर्ष शील रहा है।

सन् 18 अगस्त 1805 में राजा गुरु बालक दास जी का जन्म गिरौदपूरी धाम में हुआ। गुरुजी शूरु से ही शुरवीर क्रांतिकारी रहे है। बाबा जी ने गांव-गांव जिले व हर कस्बे पर रावटी लगाकर लोगो के हक अधिकार के लिए संघर्ष किया। गरीबों का शोषण करने वाले शासकों व अत्याचारियों के खिलाफ़ लड़ाई लड़ते राजा गुरु बालकदास बोड़सरा बाड़ा बिलासपुर के देखरेख का जिम्मा अपने एक अंगरक्षक को सौंपकर रावटी के लिए निकले, कुछ दिनों के बाद औराबांधा- मुंगेली मे रावटी_ मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसमें गुरु बालकदास शामिल हुए। राजा गुरु बालकदास 16 मार्च 1860 को रात मे जब विश्राम कर रहे थे, तो दुश्मनों ने योजनाबद्ध तरीके से उनको लक्ष्य बनाकर अचानक प्राणघातक हमला कर दिया, प्रारंभिक अफरातफरी के बाद उनके सूरक्षा दस्ते ने संभलते हुए आक्रमण का मुकाबला किया। हमलावर मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए, इस संघर्ष मे गुरु बालकदास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुरक्षा दस्ता उनको भंडारपुर-बलौदाबाजार जो सतनामियों का तत्कालिन राजधानी था, वहां ले जाना चाहते थे लेकिन अचानक रास्ता बदलकर नवलपुर ले जाने लगे, रास्ते में कोसा नामक गांव मे 17 मार्च 1860 ईस्वी को उन्होंने अंतिम सांस लिया। उनके पार्थिव देह को नवलपुर- बेमेतरा मे दफ़न किया गया। बोड़सरा से निकल कर बोड़सरा या भंडारपुर फिर कभी वापस नही आए। इस प्रकार सतनामी आंदोलन के महानायक राजा गुरु बालकदास भूमि संपत्ति और सम्मान की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

जिसके बाद मुंगेली में अपने हक अधिकार के लिए समाज की लड़ाई अत्यंत ऐतिहासिक व संघर्ष शील रहा है। वही गुरु बालक दास के साथ हुए घटना के बाद से मुंगेली के सतनामी समाज के लोग कट्टरवादी का दामन थाम लिए जिसके कारण मुंगेली को सतनामी बाहुल्य क्षेत्र भी माना जाता है। जिले में पर्यटक स्थल अमर टापू मोतिमपुर में 18 दिसंबर बाबा गुरुघासीदास जयंती के अवसर पर भव्य मेला का आयोजन होता है। जहां हजारों की संख्या में संत समाज दूर दूर से पहुंचते हैं। वही सेतगंगा सहित लालपुर धाम में भी तीन दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है।

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