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रायपुर/ एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा के नाम पर सरकारी अधिकारियों से उगाही करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। इस गिरोह से जुड़े पुलिस के एक बर्खास्त उप निरीक्षक, एक सहायक उप निरीक्षक और एक कथित आरटीआई एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है।
ACB-EOW के निदेशक और आईजी आरिफ एच शेख ने बताया, पुलिस के बर्खास्त एसआई सत्येंद्र सिंह वर्मा ने बलौदा बाजार के भाटापारा निवासी पटवारी को उसका ACB में चल रहा मामला खत्म करवाने के लिए पांच लाख रुपये मांगे थे।
उसका कहना था, वह ACB मुख्यालय से आया और आईजी आरिफ एच शेख के लिए काम करता है। पटवारी ने इसकी जानकारी ACB मुख्यालय को दे दी। भाटापारा थाने में भी इसकी रिपोर्ट लिखी गई। जांच के बाद पुलिस ने बर्खास्त एसआई सत्येंद्र सिंह वर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
रायपुर जिला पुलिस से निलंबित चल रहे ASI विनोद वर्मा और उसके साथियों ने एक वन परिक्षेत्राधिकारी को निशाना बनाया। अधिकारी के खिलाफ EOW में आर्थिक अपराध की गंभीर शिकायत बताकर दबाव बनाया। EOW के निदेशक और SP के लिए काम करने की बात कर वर्मा ने वन परिक्षेत्राधिकारी से 10 लाख रुपये लिए। पीड़ित अधिकारी ने EWO मुख्यालय में इसकी सूचना भी दी। वन परिक्षेत्राधिकारी की सूचना पर रायपुर के टिकरापारा थाने में FIR दर्ज हुई। विनोद वर्मा को भी बलौदा बाजार में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का कहना है, गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। इसमें वन विभाग का एक बर्खास्त कर्मचारी भी शामिल है।
पहले RTI से जानकारी ली, फिर उगाही के लिए बनाया दबाव
ACB अधिकारियों ने बताया, रायपुर के राजेश तराटे ने खुद को RTI एक्टिविस्ट और पत्रकार बताकर RTI से अधिकारियों-कर्मचारियों के मामलों की जानकारी ली। उसके बाद उनके खिलाफ ACB-EOW में केस दर्ज कराने का भय दिखाकर वसूली शुरू की थी।
अधिकारियों ने बताया, राजेश तराटे ने एक SDO और एक वनपाल पर दबाव बनाकर 10 हजार और 15 हजार रुपये की वसूली की गई थी। अधिक रकम के लिए वह दोनों पर दबाव बना रहा था। EOW में सूचना देने के साथ ही पीड़ितों ने रायपुर के सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज कराया। सिविल लाइन पुलिस ने दोनों शिकायतों के आधार पर तराटे को गिरफ्तार कर लिया है।

