सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला की स्वीपर ने कराया प्रसव, नवजात की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप..

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सरगुजा// छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधा किस हद तक बदतर है, इसकी बानगी ग्रामीण इलाकों में बखूबी देखी जा सकती है। ताजा मामला सरगुजा जिले के कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सामने आया है। यहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही प्रसूता जब अस्पताल पहुंची, तो वहां डाॅक्टर और नर्स कोई भी नही मिला। लिहाजा हॉस्पिटल के स्वीपर ने प्रसव कराने की कोशिश की। प्रसव के दौरान बच्चा फंस गया और उसकी मौत हो गयी।

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छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद भी ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सुविधाएं भगवान भरोसे है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज भी अधिकांश प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ ही डाॅक्टर और नर्स की किल्लत से जूझ रहे है। ताजा मामला सरगुजा जिला के लखनपुर ब्लॉक का है। यहां एक गरीब परिवा के घर में खुशियां आने से पहले ही मातम पसर गया। बताया जा रहा है कि मैनपाट क्षेत्र के सुपलगा गांव में रहने वाली प्रसूता गौरी यादव को 16 जनवरी की रात प्रसव पीड़ा बड़ गया। तकलीफ बढ़ने पर परिजन रात 11 बजे प्रसूता को लेकर कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

परिजनों की माने तो रात के वक्त जब वे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो मौके पर डॉक्टर और नर्स नहीं थे। लिहाजा प्रसव पीड़ा से रात भर प्रसूता गौरी यादव त ड़पती रही। 17 फरवरी की सुबह 7 बजे के लगभग प्रसूता की तकलीफ बढ़ने पर स्वास्थ्य केंद्र के स्वीपर श्यामपति द्वारा प्रसव कराने का प्रयास किया गया। प्रसव के दौरान बच्चा फंस गया। इसकी जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर देव कुमार साहू और नर्स अस्पताल पहुंचे। किसी तरह नवजात शिशु को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने नेडॉक्टर और नर्स पर लगाये गंभीर आरोप

नवजात की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर और नर्स पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाये है। परिजनों ने बताया कि प्रसूता गौरी का यह पहला बच्चा था। परिजन उसे समय पर स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे, ताकि उसका सुरक्षित प्रसव हो सके। लेकिन समय पर डाॅक्टर और नर्स के नही पहुंचने के कारण नवजात की मौत हो गयी।

एक डॉक्टर और एक नर्स के भरोसे संचालित स्वास्थ्य केंद्र

इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खोल दी है। बताया जा रहा है कि कुन्नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक मेडिकल ऑफिसर और चार नर्सें तैनात हैं। लेकिन इस समय तीन नर्सें मेडिकल लीव पर हैं। इसलिए अस्पताल सिर्फ एक डॉक्टर और एक नर्स के भरोसे चल रहा है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर सीएमएचओं डाॅ. पीएस मार्को ने बताया कि तीन नर्सों में से एक गर्भवती होने के कारण मैटरनिटी लीव पर है, जबकि बाकी दो नर्सें भी स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर हैं।

CMHO ने लापरवाही के आरोप से किया इंकार

प्रसव के दौरान नवजात की मौत पर लापरवाही के लग रहे आरोप पर सीएमएचओ डाॅ. मार्को ने कहा कि मामले में लापरवाही नहीं हुई है। एक ही डॉक्टर और एक स्टॉफ नर्स अपनी ड्यूूटी पूरी कर चुके थे। डॉक्टर वहीं रहकर सेवा दे रहे हैं। रात को प्रसूता को हॉस्पिटल लाया गया, तो स्टॉफ ने डॉक्टर और नर्स नहीं होने की जानकारी देते हुए प्रसूता को लखनपुर ले जाने के लिए कहा था। लेकिन परिजनों ने प्रसूता को सुबह ले जाने की बात कहकर वहीं रात भर रूके रहे। डाॅ. मार्को ने कहा कि प्रेगनेंसी के दौरान प्रसूता की कोई जांच परिजनों ने नहीं कराई थी। सोनोग्राफी तक नहीं हुई थी। बच्चा उल्टा था। इसकी जानकारी भी प्रसव के दौरान मिली। इसमें हॉस्पिटल स्टॉफ की लापरवाही नहीं

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